मणिपुर ।

फीफा अंडर-17 विश्व कप के लिए भारतीय टीम के कप्तान चुने गए अमरजीत सिंह का सफर आसान नहीं था कड़े संघर्ष के बाद आज उन्हें यह मुकाम मिला है और वह फीफा वर्ल्ड कप ने खेलने जा रहे हैं।  



मणिपुर के थाउबल जिले के गरीब परिवार से ताल्लुक रखने वाले अमरजीत आज भारतीय फुटबॉल टीम के कैप्टन है लेकिन इस स्थान पर पर वो यूँ ही नहीं पहुंच गए इसके लिए उन्होंने कड़ा संघर्ष किया है और यही कारण है की उनकी टीम के 27 में से 26 खिलाडियों ने उन्हें अपना कप्तान चुना। 



टूर्नामेंट में भारत की कप्तानी अमरजीत सिंह कियाम कर रहे हैं। वे किसी नेशनल टीम के ऐसे पहले कप्तान हैं, जिन्हें डेमोक्रेटिक तरीके से चुना गया। कोच लुईस नोर्टन डि मातोस ने एक दिन प्रैक्टिस के बाद सभी खिलाड़ियों को बुलाया। कहा- कप्तान चुनना है। हर खिलाड़ी कप्तान के विकल्प के लिए चार नाम लिखेगा। इनमें से तीन को रैंकिंग देनी होगी। 27 में से 26 खिलाड़ियों की च्वाइस अमरजीत थे।



अमरजीत के माता-पिता खेतिहर मजदूर हैं। जाहिर है, परिवार वह सुविधाएं नहीं दे पाया होगा, जो खिलाड़ी बनने के लिए चाहिए। पर बड़े भाई उमाकांत इसी संघर्ष से निकलकर क्लब फुटबॉल खेल रहे थे। यही प्रेरणा, अमरजीत को खेलने के लिए प्रेरित करती है और कड़ी मेहनत और गरीबी से लड़कर आज मणिपुर के एक छोटे से गांव का होनहार लड़का फीफा ने देश को रिप्रेसेंट करेगा।