मणिपुर ।

कहते हैं अगर सपनों में जान हो तो उसे पूरा करने की राह खुद ब खुद निकल आती है और यही बात सच साबित की है मणिपुर के शख्स ने जिसने ना सिर्फ अपनी कड़ी मेहनत से कामयाबी हासिल की बल्कि 50 सालों से उग्रवाद से ग्रस्त और बेरोजगारी का दंश झेल रहे इस राज्य में 400 लोगों को भी रोजगार देकर एक शख्स ने मिसाल कायम की है।




मणिपुर राज्य के यह शख्स हैं थांगजाम जॉयकुमार जिन्होंने सिर्फ चार कर्मचारियों के साथ अपना बिजनेस शुरू किया था, जो बढ़कर अब 400 हो गई है। आज उनकी कंपनी 15 करोड़ रुपए का सालाना कारोबार करते हुए तेजी से आगे बढ़ रही है।




जॉयकुमार ने बताया कि पर्याप्त नौकरियां बनाने में असफल राज्य मणिपुर से अधिकांश युवा भारत में रोजगार के लिए भटकते हैं। अपने ही राज्य में लोगों के लिए कुछ करने की चाहत में मैंने थंगजम एग्रो इंडस्ट्रीज की नींव रखी और आज यह कंपनी बेरोजगार नौजवानों के लिए एक आशा की किरण बनी है। थंगजाम ने अनानास का रस निकालकर बेचने के काम से अपनी कंपनी शुरू की थी, जो अब अन्य प्रोडक्ट का भी प्रोडक्शन करने लगी है।

 



थंगजाम जॉयकुमार ने मणिपुर इंडस्ट्रियल डेवलपमेंट कॉर्पोरेशन से 5 लाख रुपए और इंफाल अर्बन को-ऑपरेटिव बैंक से डेढ़ लाख रुपए लोन लेकर अपना बिजनेस शुरू किया। बिजनेस सेटअप करने में करीब 10 लाख रुपए लगे। पहले साल में लगभग 4 लाख रुपए का बिजनेस हुआ। उन्होंने बताया कि शुरुआत में उनका कारोबार धीमा था। उन दिनों अपने प्रोडक्ट को बेचने के लिए मैं खुद जीप ड्राइवर करता था।




जॉयकुमार ने अपना खुद का ब्रांड लिकला मार्केट में उतारा। जिसमें फलों का रस और अन्य पेय पदार्थों के अलावा पैक्ड ड्रिंकिंग वाटर और बेकरी सामानों की पेशकश की। जॉयकुमार अब 1000 टन से अधिक प्रोसेस्ड फूड और पेय प्रोडक्ट्स का सालाना प्रोडक्शन करते हैं, जिसमें बोतलबंद अनानास रस भी शामिल है।




जॉयकुमार की इस कंपनी में एक साल में 300 दिनों से ज्यादा काम होता है। जॉयकुमार के मुताबिक, उन्होंने इंफाल से 7 किमी दूर नीलाकुथी फूड पार्क परिसर में एकविनिर्माण संयंत्र की स्थापना की। जॉयकुमार युवाओं को बाहर आने और अपने सपनों को समझने के लिए प्रोत्साहित करते हैं। इसके साथ ही थंगजम एग्रो इंडस्ट्रीज में 98 फीसदी कर्मचारी लोकल हैं। जिनमें तकनीशियन और मशीन ऑपरेटर शामिल हैं। और 70 फीसदी कर्मचारी महिलाएं हैं।




इसके साथ ही जॉयकुमार अब इंडस्ट्रियल कैंपस में एक बाल देखभाल केंद्र स्थापित करने की योजना बना रहे हैं ताकि विवाहित महिलाओं के कर्मचारी अपने बच्चों को ला सकें, जहां पर प्रशिक्षित नर्सें बच्चों का ध्यान रखेगीं।